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 THE FIT HEART clinic 

Cardiac Superspeciality Centre

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ह्रदय की मांसपेशी के रोग (कार्डियोमायोपैथी)

 
कार्डियोमायोपैथी (सी एम पीे)वह बीमारीयों का समूह है जिसमें, कोरोनरी धमनी रोग/ उच्च रक्तचाप/ वाल्वुलर हृदय रोग या जन्मजात दिल की बीमारियों इत्यादि ना होन के बावज़ूद, हृदय की मांसपेशी की संरचना और कार्यप्रणाली मे दोष होता है अर्थात दिल की बनावट और काम दोनों मे गड़बड़ी होती है।यह रोग, एक ओर मरीज़ को कोई भी तकलीफ ना होने से लेकर तो दूसरी ओर गंभीर स्वास्थ्य समस्या (यहाँ तक की मृत्यु भी) के रूप तक मे प्रस्तुत कर सकता है। 
 
इस समूह में शामिल हैं:
  • डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (डी सी एम): कार्डियोमायोपैथी का सबसे आम स्वरूप जिसमें बाएं या दोनों वेंट्रिकल का संकुचन (पंप करनाबिगड़ जाता है।
  • हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (एच सी एम): दूसरा सबसे आम स्वरुप। इसमें आमतौर पर बाएँ वेंट्रिकल की मांसपेशी की मोटाई में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। 
  • रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी (आर सी एम): दुर्लभइसमें एक / दोनों वेंट्रिकल के पूरी तरह  खुल पाने के कारण रक्त का उनमे भरना प्रतिबंधित या कम हो जाता है और इसलिए ह्रदय से बाहर निकलने वाला रक्त भी कम हो जाता है जबकि ह्रदय का पम्पिंग सामान्य रहता है।
  • अरिदमोजेनिक  राईट वेंट्रिकुलर कार्डियोमायोपैथी / डिस्प्लेज़िया  (ARVC / ARVD): यह ह्रदय की मांसपेशी एक आनुवंशिक प्रगतिशील रोग है जिसमे दाएं वेंट्रिकल में मांसपेशी की जगह चर्बी और रेशें ले लेते है। 
 

प्रबंधन एवं उपचार 

  • उपचार के ज़्यादातर विकल्प मूलतः रोगी की कार्डियोमायोपैथी से होने वाली शिकायतों को ठीक करने के लिए (ना कि खुद कार्डियोमायोपैथी को जड़ से समाप्त करने के लिए), जैसे हृदयपात का इलाज, दिल में खून की गुठली बनने से बचना, अचानक मृत्यु से बचना इत्यादि।  
  • कार्डियोमायोपैथी के उन मरीजों की पहचान करना अत्यावश्यक है जिनको ह्रदय की धड़कन की गंभीर समस्याएँ हो सकती है क्योंकि इनको इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (आईसीडी) नामक यंत्र लगाकर अकस्मात् मृत्यु से बचाया जा सकता है। 
  • कार्डियोमायोपैथी के सभी रोगियों की शरीर की कार्य क्षमता, हृदय की क्रियाओं और ह्रदय की धड़कन की गंभीर समस्याओं के जोखिम के आकलन के लिए गहराई से जांच होनी चाहिए।
  • एच सी एम्  में आपरेशन के द्वारा ह्रदय की अतिरिक्त मांसपेशियों को नष्ट करके इलाज किया जा सकता है।
  • जिनमे दिल की विफलता या हृदयपात का किसी तरीके से भी इलाज नहीं हो पा रहा है, ऐसे रोगियों में आवश्यक हृदय प्रत्यारोपण की ज़रूरत पड़ सकती है।